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Film script || हिंदी फ़िल्म स्क्रिप्ट ।। फ़िल्म के कहानी कैसे लिखा जाता है ।। Bollywood movie script

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  “सिंदूर और अर्थी “

 

कलाकार परिचय 

1 अनुपम 2 सेठ कालीचरण 3 मुंशी , शेठ कालीचरण का मुंसी 4 राजू ( नायक) 5 हवलदार 6 सिपाही 7 त्रिपुरक़री 8 कालू 9 बलबीरा 10, रामु ,पंडित, एसडता। बृजेश , 

स्त्री – गंगा  आरती शिखा सोनिया

【पहला सीन 】

स्थान- अनुपम का घर 

अनुपम एक चार पाई पर लेटा है , वो बहुत समय से बीमार है और उसकी पत्नी गंगा बगल में बैठी अनुपम का पांव दबा रही है । चारपाई के नीचे दावा की शीशी ग्लास और एक घरेलू सामान राखा हुआ है ।

अनुपम – गंगा रात बहुत हो चुकी है , जाओ तुम खाना खा कर सो जाओ । गंगा- नही जी मुझे  भूख नही है फिर आप कई  दिनों से मुँह में एक दाना भी नही दिए है । ऐसे में मैं भला कैसे खा सकती हूं । अनुपम – गंगा तुम फिक्र मत करो । मैं तो पक्के आम की तरह हु कब गिर जाऊंगा कुछ मालूम नही । गंगा- नही जी ऐसा ना कहे , आपको कुछ नही होगा आप बिलकुल ठीक हो जाएंगे ।  अनुपम – गंगा मेरी उम्र अब ढल चुकी है । मौत मुझे अपने आगोश लेने के लिए बेताब है इस दुनिया मे । इस दुनिया मे आज तक वही हुआ है जो भगवान की मर्जी हुई है । आह ओह ( दर्द से कराह रहा है अनुपम)

गंगा- (बैचैनी से ) जी । आपको किया हो गया , मैं अभी डॉक्टर को बुला कर लेती हूं । ( जाना चाहती है ) अनुपम – रुक जाओ गंगा , तुम बाहर मत जाओ । मेरी जिंदगी कुछ पल के लिए है । गंगा – (रोते हुए) आप ऐसी बाते मत कीजिये , इस दुनिया मे नारी की सर्व सम्मान उसका पति होता है । मुझे अनाथ मत बनाइये   अगर आपको कुछ हो गया तो मेरी और मेरी बेटी सोनिया को कौन संभालेगा ।

अनुपम- गंगा तुम हिम्मत रखो । मुझे अब मौत बुला रही है , गंगा तुम मुझसे एक वादा करो । गंगा – ( रोते हुए) नही , आप मुझे छोड़ कर नही जा सकते है । अगर आपको कुछ हो गया तो मैं भी जान दे दूंगी । अनुपम – (तरपते हुए) मेरे पास समय बहुत कम है आज से सोनिया का देख रेख तुम अच्छी तरह से करना उसकी शादी अब तुम्ही को करनी है , आज तक मैं मजदूरी करके पैसा जमा किया था और उसी पैसे से मैंने एक अंगूठी बनवाई थी । ऐसे संभाल कर रखना । मेरी निशानी को सोनिया के शादी के वक्त सोनिया को पहना देना । मुझसे वादा करो कि तुम मेरी आखिरी मनोकामनापूर्ण करोगी ?

गंगा- (बिलखते हुए) मैं वादा करती हूं मैं कपकि हर मनोकामनापूर्ण करूंगी । अनुपम – (अंगूठी देते हु) लो ऐसे संभाल कर रखना । मुझे मौत बुला रही है गंगा

 ( हिचकी आती है और अनुपम एक और लूरहक जाता है )

गंगा-(लिपट कर रोती हुई) आप मुझे छोड़ कर नही जा सकते । है भगवान ऐ तूने किया कीया मुझे और मेरी बेटी को अनाथ बना दिया।

( सोनिया का प्रवेश) माँ । मा बापू को किया हो गया माँ । ( अनुपम से लिपट कर ) बापू आंखे खोलो बापू किया हो गया बापू आपको उठो न बापू । गंगा- (सोनिया से) बेटी । तेरे बापू हम दोनों को छोड़ कर चल बसे । सोनिया – नही ( रोने लगती है )  गंगा – रो मत बेटी , हम दोनों की किस्मत में यही लिखा था । होनी को कौन टाल सकता है ?

( गंगा और सोनिया दोनों रोती बिलखती है)

(रोना सुनकर परोसी सब जमा हो जाता है ) 

रामु- (अनुपम का लाश देख कर ) अनुपम भैया तो इस दुनिया से चल बसे । (गंगा सोनिया को धीरज बांधते हुए) मत रोइए भाभी अब रोने से तो अनुपम भैया वापस तो नही आएंगे ? ये तो दुनिया का रीत है जो आया है उसे एक न एक दिन जाना जरूर है । गंगा- रामु बाबू , अब मैं किया करू ? मुझे अब कौन सहारा देगा।  मेरी बाकी जिन्दगी किस तरह से कटेगी । सोनिया – रामु चाचा । मुझे अब बेटी कौन कहेगा ? अब हम अनाथ हो गए चाचा । (रोने लगती है ) रामु- (सोनिया से) मत रो बेटी । जिसका सहारा कोई नही होता उसका भगवान होता है । भगवान के आगे किसका चलता है । भगवान के मर्जी बिना हम लोग तो किया पत्ता भी नही हिलता है । (गंगा से) भाभी अब भैया का दाह संस्कार करना चाहिए । सोनिया- माँ । गंगा – रामु बाबू आप सेठ साहब के पास चले जाइये मैं किया कर सकती हूं ? मेरे पास तो कुछ भी नही है । रामु – ठीक है भाभी , मैं जा रहा हु । आप सब इधर की तैयारी कीजिये ( रामु का प्रस्थान) गंगा- है भगवान ये तुमने किया किया ? तुम्हे किया मिला मेरी जिंदगी में आग लगाने से ? सोनिया – माँ भगवान ने मेरे बापू को छीन लिया । अब हमें सहारा कोन देगा? ( उसी समय रामु हाथ मे कफन और कुछ सामान ले कर मुंशी के साथ प्रवेश ) मुंशी – (गंगा से) गंगा , अब रोने से किया फायदा ? तुम दिल छोटा मत करो ऊपर वाले ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा । ( पैसा देकर) लो ऐसे रखलो । सोनिया- मुंशी जी हम दोनों को कौन देखेगा ? मेरे बापू ने हमे छोड़ कर चले गए । मुंशी- मत रो सोनिया । हमारे सेठ जी बहुत अच्छे आदमी है । अनुपम से उन्हें कोई शिकायत नही था । मैं तुहारी माँ को काम पर लगवा दूंगा । तुम बिल्कुल चिंता मत करो । रामु- चलिए मुंशी जी सारी तैयारी हो गई है । मुंशी- चलो ।

(आगला सीन दाह संस्कार)

[रामु एवं सारे परोसी मिलकर अनुपम का लाश उठा कर ले जाता है गंगा सोनिया लिपट कर रोती है सभी लोग बोलते है राम नाम सत्य है , राम नाम सत्य है फिर घर का सीन जहाँ लाश जल रहा है]

दूसरा  सीन

स्थान- सेठ कालीचरण की हवेली

[ सेठ कालीचरण एक शानदार कुर्शी पर बैठा सिगरेट पी रहा है । कालीचरण बहुत बड़ा आदमी है उसके परिवार में  उसकी पत्नी आरती एवं 20 वर्ष बेटा राजू है ]

कालीचरण -( सिगरेट बुझाते हुए) कियु मुंशी जी ? अभी तक गंगा काम पर नही आई ? अब तो अनुपम को मरे दो चार हफ्ते हो गये । मुंशी- ( आंख चमका कर ) सरकार । गंगा जरूर आएगी । अभी पति के मौत से मायूस है । कालीचरण – अब कितना दिन तक पति का गम मनाएगी ? मरने वाले कभी वापस नही आते मुंशी जी । मुंशी – ( हाथ चमका कर ) वो तो ठीक है सरकार मगर ….

कालीचरण- मगर किया मुंशी जी ? मैं ज्यादा इंतजार नही कर सकता । अगर वो आज काम पर आएगी तो ठीक है वरना मैं कल दूसरा नॉकर रख लूंगा , समझे । आरती- (प्रवेश) आप भी अजीब है उस बेचारी के ऊपर गम की पहाड़ टूट गई है और आपको काम की पड़ी है ? कालीचरण – तो ठीक है । मैं कल दूसरा नॉकर रख लेता हूं । वो अपना मातम मानती रहे । आरती – आप इस तरह के बातें कियु करते है ? अनुपम आज तक आपके पास काम करता रहा । अब तो उसके परिवार का देख रेख करना आपके फर्ज है । कालीचरण – ( तिलमिला कर) फर्ज । कैसा फर्ज ? वो काम करता था तो पैसे भी लेता था । खैरात का थोरे ही करता था । दुनियां बहुत आगे निकल चुकी है ( उसी समय सादे लिवास में गंगा का प्रवेश ) मुंशी- ( चस्मा को ठीक करते हुए ) सरकार गंगा तो आ गई । कहते सुनते । गंगा- (हाथ जोड़ कर) नमस्ते सेठ जी ,नमस्ते मालकिन ,नमस्ते मुंशी जी ।

आरती- नमस्ते । कालीचरण – ठीक है तुम अपनी काम पर जाओ ( घड़ी देख कर) और कल से समय पर आना समझी?  गंगा- जी मालिक,  आरती – चलो गंगा मैं तुम्हे काम समझा देती हूं । गंगा – जी मालकिन ।

“”समाप्त “”

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