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2022 ईद कैसे मनाई जाती हैै इसकी पूरी जानकारी

Eid kaise manaye

2022 ईद कैसे मनाई जाती हैै इसकी पूरी जानकारी

 

रमजान का महीना इशालामिक कैलेंडर में नो स्थान माना गया है। इस समय अल्लाह की इबादत कराते है साथ ही बिना कुछ खाए पिए रोज रहते हैं। और दशेव महीना की पहली चांद वाली रात ईद की रात होती है। इस चांद को देखने के पश्चात ही ईद उल फितर का ऐलान होता है।

इस ईद को सैवैया वाली या मीठी ईद कहते हैं, इस बार ईद मुबारक का तैयोहर ठाकुर कैलेंडर के अनुसार 14 मई को मनाया जा रहा है। इस त्योहार यानी की ईद त्योहार में भाई चारे बढ़ावा देने और बरकत के लिए दुआ मांगने वाला त्यौहार है। तो चलिए जान लेते है ईद क्यों मनाई जाती है और इस पवित्र ईद त्यौहार की शुरूवात कब हुई।

जानिए ईद इसलिए मनाते है

दोस्तो कुरान के अनुसार , रमजान के पाक महीने में रोजा रखने के पश्चात अल्लाह अपने बंदों को बक्शीश और इनाम देता है। इसीलिए ये त्यौहार को ईद कहते हैं। इनाम और बक्शीस के इस दिन को ईद उल फितर कहते हैं। और दोस्तों मुसलमान ईद में खुदा का शुक्रिया इस लिए भी करते हैं क्योंकि 1 महीने उपवास रखने की साहस और ताकत दी।

मुसलमानों ने ईद पर कुछ रुपए पैसे या अनाज गरीब असहाय लोगों के लिए निकाल देते हैं। ईद में नमाज के बाद फेमिली में सभी लोगों का फितरा देता है। जिसमे से की दो किलो ऐसी चीजें दी जाती है जो रोजाना खाने की हो।

ईद मुबारक की शुरुवात इस लिए हुई थी

ईद क्यों मनाई जाती है
ईद क्यों मनाई जाती है

प्रथम ईद उल फितर पैगंबर मोहमद ने सन 624 को जंग – ए -बदर के बाद मनाई थी। पैगंबर हजरत मोहमद ने बद्र के लड़ाई में जीत हासिल की थी। उनके विजय होने की खुशी में ये ईद की पवित्र त्योहार मनाई जाती है। ईद के दिन मस्जिदों में सुबह की नमाज अदा करने से पहले हर मुसलमान का फर्ज होता है कि वो दान या जकात दे।

ईद में खाते हैं मीठी सेवई (ईद कैसे मनाई जाती हैै)

इस रमजान माह में रोजे रखने को फर्ज करार दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंसान को भूखा प्यासा का एहसास हो सके और वह लालच से बहुत दूर हो के सच्ची रास्ते पर चले। दोस्तों रमजान में विभिन्न प्रकार के पकवान तथा मिठाईयां बनाई जाती हैं। और दोस्तों पड़ोसी में खिलाते हैं।और तौफे भी देते हैं।

ईद के ढाई महीने बाद बकरीद

दोस्तों ईद मुबारक के  सिर्फ ढाई माह बाद ईद उल अजहा आ ती है। इसको बकरीद भी कहा जाता है। साथ ही इसको ईद ये कुर्बानी भी कहा जाता है। क्योंकि इस दिन नियमो का पालन करते हुए कुर्बानी दी जाती हैं। इस त्यौहार की शुरूवात हजरत इब्राहिम से हुई थी।

 

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